हमतव देखे पुरुब्वा के झोका बबुनी.
हमके रास्ते म देबू तू धोका बबुनी..

हमतव देखे पुरुववा के चाँद बबुवा.
हमके सेतय म देबेया बिसार बबुवा..

हमारे मनवा म नइखे ब पाप बबुनी.
जोदाब सातव जनाम्वा के तार बबुनी..

हमरा पत्थर करेजवा न आ बबुवा..
हमारी नेहिया से करा न खिद्वाद बबुवा..

हमारी आखिया के बातू तू ज्योति बबुनी..
तोहके विपदा से राखावे हम ओट बबुनी..



मुस्करा के देखली, तीर दिल में उतर गईल
जख़्म सह न पईली, हम आशिक रहनी नया - नया
अगले दिन मिलेगली , लेके हाथ में गुलाब क कली
देख के गश खा गईल, उ सईया के बहिया मे मिलल

बाहर सन्नाटा रात के, कनवा में पायल गुजय
सन सन हवाईया गीत गावे, कवन ह उ पूछत
अउर हम घायल पडली, शायरी क गोद में
जाम के प्याला लबों पे, दिल रहल परलोक में।

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Comment by sudhir shah on January 16, 2010 at 5:07pm
bahut badia bhayia ji

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