syed asifimam kakvi

नीतीश के सामने नतमस्तक महारथी

नीतीश के सामने नतमस्तक महारथी

Source: SYED ASIFIMAM KAKVI
प्रतिबद्धता का पाखंड रचने वाले बड़े-बड़े चमकदार नामों का नीतीश के सामने बिछ जाना हैरान करने वाला है। नीतीश ने पत्रकारिता की दुनिया को जिस तरह से साधा है, उस तरह से बिहार में 60 सालों में कोई नहीं कर पाया।

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले ही मीडिया के एक हिस्से में नीतीश कुमार के पक्ष में जिस तरह से माहौल बनाया जा रहा है, उसने विश्वसनीयता का घोर संकट पैदा कर दिया है। पिछले दिनों दिल्ली में एक नई अंग्रेजी पत्रिका के बैनर तले आयोजित सेमिनार में जो हुआ, वह इसकी मुनादी करता है। अखबार से लेकर टीवी तक के सूरमा माने जाने वाले खबरनवीस मंच से खुलेआम कहते नजर आए कि नीतीश के राज में बिहार विकास के हिंडोले में झूलने लगा है और अगर वह सत्ता में नहीं लौटे, तो बिहार फिर से दुर्दिन के दौर में लौट जाएगा।

बिहार में राजकाज की पत्रकारीय-समाजशास्त्रीय समीक्षा नीतीश वंदना से आगे ही नहीं बढ़ सकी। अंग्रेजी के एक धुरंधर पत्रकार और लोकसभा के पूर्व सदस्य, अपने अखबार को आंदोलन कहने वाले एक संपादक, बनते भारत की खबर दिखा रहे हाशिये पर पड़े एक टीवी संपादक, एक स्वयंभू राजनीतिक विश्लेषक, दिल्ली यूनिवर्सिटी में इतिहास पढ़ाते-पढ़ाते राजनीतिक समीक्षक बन गए एक प्रोफेसर, एक बिल्डर- सभी में होड़ लगी थी कि कौन नीतीश के कितने गुण गा सकता है।

हद तो तब हो गई जब नीतीश वंदना में जमकर गलत आंकड़े उछाले गए। मसलन, बताया गया कि नीतीश ने पांच साल में कोई दो लाख स्कूली शिक्षकों की नियुक्तियां कीं। जिन नियुक्तियों का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वह दरअसल पांच हजार रुपए के मानदेय पर थोक के भाव में हुई बहालियां हैं, जिन्हें शिक्षा मित्र और पंचायत शिक्षक जैसे विशेषणों से अलंकृत किया गया है।

प्राथमिक शिक्षा ही नहीं, उच्च शिक्षा में भी यही हालत है। प्रोफेसरों को महीनों तनख्वाह नहीं मिलती और मिलती भी है तो आधी-अधूरी। परखनली और प्रिज्म से आगे नहीं बढ़ पाई हैं बिहार के कॉलेजों की प्रयोगशालाएं। नई यूनिवर्सिटी खोलने की बात छोड़ दें, जो पहले से हैं उनकी भी हालत जर्जर है। राज्य के कॉलेजों पर सरकार ने नोट छापने का जबरदस्त दबाव बना रखा है। नतीजा, हर जिले के दो-चार कॉलेजों में बीबीए और बीसीए जैसे रोजगारपरक विषयों की पढ़ाई शुरू हो गई। इस तथ्य को खतरनाक तरीके से दबा दिया गया कि इनमें से 90 फीसदी से ज्यादा संस्थानों के पास अपने विशेषज्ञ नहीं हैं।

यही हाल स्वास्थ्य का है। अस्पतालों की इमारतें तो चमका दीं, लेकिन दीवारों से अस्पताल बन जाते तो बात ही क्या थी। जिला अस्पतालों के पास ईसीजी और अल्ट्रासाउंड जैसी गुजरे जमाने की मशीनें तक नहीं हैं। एक ही डॉक्टर हर मर्ज का इलाज कर देता है। पर्चियां काटने और जेनेरिक दवाएं बांटने को नीतीश कुमार के प्रचारक यह साबित करने के अभियान में जुटे हैं कि उन्होंने राज्य का कायाकल्प कर दिया है।

जिला मुख्यालयों तक में छह घंटे बिजली की गारंटी नहीं है। बीपीएल कार्ड बिना लिए-दिए बन जाए तो चमत्कार और योजना लाभ की फाइल आगे बढ़ जाए तो बात ही क्या। हां, भ्रष्टाचार उन्मूलन के ढोल-नगाड़े से एक बात जरूर हुई है। भ्रष्टाचार की दर महंगी हो गई है। साढ़े ग्यारह हजार करोड़ के बेहिसाब खर्चे को इसी से जोड़कर देखा जाना चाहिए। इस तमाशे का पर्दाफाश करने के बजाय पत्रकारिता के कुछ खंडित चेहरे पुष्पहार लेकर पटना से दिल्ली और मुंबई तक दौड़ लगा रहे हैं।

वैकल्पिक मीडिया ने भी इस पर गजब की चुप्पी साध रखी है। प्रतिबद्धता का पाखंड रचने वाले बड़े-बड़े चमकदार नामों का नीतीश के सामने बिछ जाना हैरान करने वाला है। नीतीश ने इस दुनिया को जिस तरह से साधा है, उस तरह से बिहार में 60 सालों में कोई नहीं कर पाया। नीतीश के लिए यह उपलब्धि हो सकती है, लेकिन इसने उस संसार की विश्वसनीयता को खतरे की खाड़ी में फेंक दिया है जिसके शब्दों को हाशिए पर पड़ा आदमी सच मानकर अपने फैसले लेता है।

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syed asifimam kakvi Comment by syed asifimam kakvi on September 3, 2010 at 9:01am
JI BHIE HUMARE BIHAR BAHUT BADAL GIYA HAI .SAUCH BAT BHI LOGE NAHI SUNTE HAI BIHAR KE LOGE ARE KHUCH NAHI BADLA BUS LOGE BADAL RAHE HAI PER HUMARI SARKAR NAHI BADLI AFSAR SAHI NAI BADLI .KHUCH NAHI BADLA .
syed asifimam kakvi Comment by syed asifimam kakvi on September 2, 2010 at 11:40pm
bhie saheb jo sauch hai weh me likhta hu .
amit verma Comment by amit verma on September 2, 2010 at 9:09pm
bhaisaahab abhi aap bihar may hai ki dubai may? lagta hai aapko bahut saal hua bihar aaya hooway
Arbind kumar Comment by Arbind kumar on September 2, 2010 at 8:28pm
Their has been big change in all persepective this is the ground reality but need more than that.If media is making good image of Bihar then why u guys bother about it.
Its good and indiarectly it will benifited for Biharies.
But one thing is clear Nitish have to do more what he has done.
nida khan Comment by nida khan on September 2, 2010 at 7:51pm
जो भी कहना हैं कहे, आपके लेख से यही बात पता चली की- कुछ ना होने से अच्छा तो कुछ होना है.

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