कमरतोड़ महंगाई से जनता को राहत दिलाने के दावे करने वाली सरकार ने आखिरकार अपना रंग दिखा दिया. महंगाई के आगे लाचार सरकार को जनता से ज्यादा तेल कंपनियों के घाटे की चिंता हुई, लिहाजा सरकारी तेल कंपनियों को आम आदमी की जेब खंगालने की खुली छूट दे दी गई. डीज़ल के दाम बढ़ाकर सरकार ने जनता को ठेंगा दिखा दिया है आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये महंगाई रुक क्यों नहीं रही है. आखिर क्यों सरकार की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है. आखिर क्यों आम आदमी झुलसने को मजबूर है. तैयार रहिए नई महंगाई के लिए, तैयार रहिए जेब कटाई के लिए, तैयार रहिए जरूरतें घटाने के लिए, तैयार रहिए खुशियां लुटाने के लिए.वैसे तो अब ये जिंदगी की आदत सी बन गई है. लेकिन, दिल में हर बार टीस तो उठती ही है जब जिंदगी की कुछ जरूरतों में नई कटौती हो जाती है. महंगाई की नई किश्त लादने की तैयारी चल रही है. सरकार इन्हीं कोशिशों में लगी हुई है कि कैसे महंगाई के नए झटके दिए जाएं. एक के बाद एक नई दलीलें दी जा रही हैं तेल की कंपनियों की चिंता है, लेकिन आम लोगों की नहीं. जब देश में नीतियां तेल कंपनियों को ध्यान में रखकर ही बननी हैं फिर तो आम लोग अपनी भलाई खुद ही सोच लें. बात तेल कंपनियों की शुरू हुई है तो उनकी दलील भी सुन ही लीजिए.कंपनियां रो रही हैं नुकसान का रोना, वो कहती हैं कि पेट्रोल की बिक्री पर उन्हें 5 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है. डीजल पर नुकसान का आंकड़ा 19 रुपए से ज्यादा का है. केरोसिन के प्रति लीटर की बिक्री पर नुकसान 34 रुपए से ज्यादा का बताया जा रहा है और रसोई गैस में हर सिलेंडर पर नुकसान 350 रुपए का हो रहा है.जाहिर है तेल कंपनियों और सरकार के पास आंसू बहाने का पूरा बहाना है. और जब मंत्री जी आंसू पोंछने के लिए खुद खड़े हैं तो फिर आंसू भी ज्यादा निकलने लगते हैं. हां, मंत्री जी को आंसू अगर नहीं दिखता है, तो वो है आम लोगों का. हर तरफ से महंगाई की मार है और आम लोग उसे झलने को मजबूर.डीजल के दाम बढ़ने और रसोई गैस महंगी होने से जनता पर दोहरी मार पड़ी है। देश के लोग केंद्र सरकार को कोस रहे हैं। सरकार के दिए इस बड़े झटके से आम जनता को महंगाई का करंट लगा है डीज़ल के दामों में बाज़ार के हिसाब से सुधार करने की कोशिश के चलते एक बार फिर मनमोहन सिंह सरकार ने डीजल की कीमत में भारी बढ़ोतरी की है और प्रति लीटर पांच रुपये बढ़ा दिए हैं.इसके साथ ही सस्ते दाम में मिल रहे एलपीजी के सिलेंडरों की संख्या भी सीमित कर दी है.अब एक उपभोक्ता को एक साल में सस्ते दाम में सिर्फ छह सिलेंडर ही मिलेंगे और उन्हें सातवां सिलेंडर बाज़ार भाव से लेना पड़ेगा.सातवें सिलेंडर की फिलहाल कीमत 746 रुपये होंगी और सिलेंडर की कीमत हर महीने तय की जाएगी. पूरे देश में विरोध होगा पर आर्थिक दृष्टिकोण से यह एकदम उचित और भविष्य के लिए सही कदम है. विभिन्न राजनैतिक दलों के द्वारा इस कदम का कड़ा विरोध किया जाना है पर सरकार के पास क्या कोई अन्य विकल्प भी हैं जिन पर चलकर वह मंहगें खरीदे हुए तेल और गैस को सस्ते दामों पर बेच सके इस बात पर कोई भी नेता या दल अपनी राय नहीं देना चाहता है ? देश की सबसे बड़ी समस्या यही है कि आम जनता आज भी नेताओं के द्वारा दिखाए जाने वाले झूठे आंकड़ों पर विश्वास कर लेती है और उसे वास्तविक स्थिति का सही अंदाज़ा ही नहीं होने पाता है ? हमारे आज के नेता पूरी तरह से असफल साबित हुए हैं. पेट्रोलियम क्षेत्र में दी जा रही सब्सिडी का जितने बड़े पैमाने पर दुरूपयोग किया जा रहा है उसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है. जिससे अब यह स्थिति भी आ गयी है कि केवल 6 सिलेंडर ही सब्सिडी के साथ मिलेगें और बाक़ी बाज़ार के मूल्य के अनुसार खरीदने पड़ेंगें. दीर्घकालीन नुकसान आम जनता का ही होता हो सरकार चाहे राजग चलाये या संप्रग ग़लत नीतियों का खामियाज़ा हमेशा जनता जो ही भुगतना पड़ता है.
Comment
Comment by Gaurav Gupta on September 18, 2012 at 8:23pm केंद्रा सरकार एक ही बार में महंगाई बढ़ा दे
Comment by Gaurav Gupta on September 18, 2012 at 8:22pm सरकार 500 रूपये किलो टमाटर आलू प्याज क्यों नहीं कर देती एक ही बार में धीरे धीरे महंगाई क्यों बढ़ा रही है पेट्रोल के दाम 5000 रुपिया लीटर हो तो और भी अचा और जितना पैसा जमा होगा उसको लेकर सरकार दुसरे प्लानेट पे चली जाए क्या बकवास सरकार चलाया जा रहा है
Comment by Gaurav Gupta on September 17, 2012 at 5:05pm सरकार तो बेरहम है ही मेरी हालत भी खराब हो गई है इस महंगाई से लोगो के जेब में पैसे हैं ही नहीं तो अंतरास्त्रिया रेट पे सामान कैसे खरीदेंगे भला टैक्स लेना सरकार का काम है फ्री में सिक्स्थ पे कामिसन लागु कर के सलारी बहुत ज्यादा बाधा दी सरकारी बाबुओ की अब सरकार की कमर टूट रही है तो जनता का तोड़ रही है किसने बोला था सरकारी बाबु को इतना सैलरी देने के लिए क्या अपना धंधा रोजगार कर के लोग 50 हज़ार रुँपैया महीने का कमा लेते है सब सरकार की अदुरदर्शिता का पैनाम है जब यहाँ लोगो के tallent का वलुए कम है तो रुपैया का value कम नहीं होगा इसके लिए मैं नया आईडिया लाऊँगा पका जल्द ही कैसे कम नोट छापे कैसे दाम घत्ताए
हम लोग की यह हालत हो गई है की हम हर चीज़ पर सबसीडी लेते हैं । दुनिया में भारत ही एक ऐसा देस है जहा जनता को हर चीज़ सरकार आधे दाम पर देती है। कोई टैक्स देता नहीं है । सरकार नोट पर नोट छापते चली जा रही है । अंजाम यह है की अपना रुपैया क्रश कर गया है, रूपये की आज कोई मूल्य नहीं है अंतररास्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में । GDP घाट के 5% होगया है और inflation 7.6%. कहीं जॉब नहीं है । बुजेत देफेसित अरबों में है। भारत दिवालिया हो चूका है ।
हम भारतवासियों को सर्कारी भीख लेना बंद करना होगा । अगर हमें देश को बचाना है तो हमें अंतर राष्ट्रीय कीमत पर सामान खरीदना होगा.अपने देश में । नहीं तो अल्लाह ही मालिक हैं ।
मुन्ना लाल केडिया
एम्. ऐ , एम् ऐ (USA ) एम् बी ऐ
Started by Amresh Rajput in Bihar 20 hours ago. 0 Replies 0 Likes
Started by Raman Tiwari in Bihar. Last reply by ajay jha on Friday. 5 Replies 0 Likes
Posted by Suren Yadav on June 2, 2012 at 6:37pm 1 Comment 4 Likes
Posted by Gunjan Kumar on October 4, 2012 at 9:03am 2 Comments 1 Like
Posted by Gunjan Kumar on October 2, 2012 at 3:15pm 3 Comments 0 Likes
© 2013 Created by Shalu Sharma.


You need to be a member of Bihar Social Networking and Online Community to add comments!
Join Bihar Social Networking and Online Community