SYED ASIFIMAM KAKVI
खुशियों और दुवाओं के पर्व ईद उल फितर की रौनक दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. अब बस इंतजार है तो रमजान माह के खत्म होने और पवित्र चांद के दिखने का. चांद के दिखने के साथ ही शुरू होगा ईद-उल-फितर का जश्न.
Eid ul Fitr: क्या है अर्थ इस त्यौहार का
ईद उल फितर रमजान माह के खत्म होने के अवसर पर मनाया जाता है. सेवइयों में लिपटी मोहब्बत की मिठास का त्यौहार ईद-उल-फितर भूख-प्यास सहन करके एक महीने तक सिर्फ खुदा को याद करने वाले रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है. इस दिन विभिन्न धर्मों के लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सेवाइयां अमूमन उनकी तल्खी की कड़वाहट को मिठास में बदल देती हैं. दुनिया में चांद देखकर रोजा रहने और चांद देखकर ईद मनाने की पुरानी परम्परा है और आज के हाईटेक युग में तमाम बहस के बावजूद यह रिवाज कायम है.
Eid ul Fitr: How to Celebrate
ईद के दिन लोग सुबह-सुबह उठकर स्नानादि करके नमाज पढ़ने जाते हैं. जाते समय सफेद कपड़े पहनना और इत्र लगाना शुभ माना जाता है. सफेद रंग सादगी और पवित्रता की निशानी माना जाता है. नमाज पढ़ने से पहले खजूर खाने का भी रिवाज है. नमाज पढ़ने से पहले गरीबों में दान या जकात बांटा जाता है.
नमाज अदा करने के बाद सभी एक-दूसरे से गले मिलते हैं और ईद की बधाई देते हैं. ईद पर मीठी सेवइयां बनाई जाती हैं जिसे खिलाकर लोग अपने रिश्तों की कड़वाहट को खत्म करते हैं. इस दिन “ईदी” देने का भी रिवाज है. हर बड़ा अपने से छोटे को अपनी हैसियत के हिसाब से कुछ रुपए देता है, इसी रकम को ईदी कहते हैं.
ईद-उल-फितर समाज में भाईचारे को बढ़ाता है और भारत जैसे देश में जहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ रहते हैं वहां ईद-उल-फितर समाज में एकता बढ़ाने का बहुत अच्छा काम करता है.
Rules for Prayer of Eid-ul-Fitr
ईद की नमाज अदा करने से पहले मीठा खाकर निकलें और वापसी में दूध में भिगोया छुहारा खाएं. ईद-उल-फितर में 13 चीजें सुन्नत हैं. मस्जिद जाने के क्रम में ‘अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा, इल्ललाहु, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द’ कहना चाहिए. नमाज के बाद सबसे गले मिलें और सेवइयां खिलाएं.
ईद की नमाज के बाद इमाम खुत्बा देते हैं और दुआ फरमाते हैं। इसके बाद सभी ईमान वाले एक-दूसरे के गले लगकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। ईद की ससे ज्यादा खुशी बच्चों को होती है। इस दिन बच्चों के चेहरे की रौनक देखते ही बनती है।
Sunnah of Eid ul Fitr – ईद के दिन की सुन्नतें
सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने के खुद की सफाई और कपड़े वगैरह तैयार रखना।
ईद के दिन की सुन्नतें इस तरह हैं- 1. शरीयत के मुताबिक खुद को सजाना 2. गुस्ल करना 3. मिस्वाक करना 4. अच्छे कपड़े पहनना 5. खुशबू लगाना 6. सुबह जल्दी उठना 7. बहुत सवेरे ईदगाह पहुंच जाना 8. ईदगाह जाने से पहले मीठी चीज खाना 9. ईद की नमाज ईदगाह में अदा करना 10. एक रास्ते से जाकर दूसरे रास्ते से वापस आना 11. पैदल जाना 12. रास्ते में धीरे-धीरे तकबीर पढ़ना.
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अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है ऐ मेहबूब बेशक हमने तुम्हे बेशुमार खूबियाँ अता फरमाईं तो तुम अपने रब के लिए नमाज पढ़ो और क़ुरबानी करो (इस आयात की तफसिर में एक कौल यह भी है कि नमाज से मुराद नमाज़े ईद है) (कन्जूलईमान तर्ज़मे कुरान रुकु 33 सफा 962) ईद व बक़राईद की नमाज वाजिब है मगर सब पर नहीं बल्कि सिर्फ उन्हीं लोगों पर जिन पर जुमा फर्ज़ है बिला-उज्रे शरई के ईद की नमाज छोड़ना सख्त गुनाह है। (रद्दुल मुहतार 555) व (कन्जूदकाईक सफा 45) मसअला- इदैन की नमाज़ जायज़ होने की वही शर्तें हैं जो जुमा के लिए हैं सिर्फ इतना फर्क है कि जुमा का खुतबा शर्त है और इदैन का खुतबा सुन्नत है दूसरा फर्क यह है नमाजे जुमा का खुतबा नमाजे जुमा से पहले है और इदैन का खुतबा नमाजे इदैन के बाद है तीसरा फर्क यह है कि जुमा के लिए अजान व एकामत है और इदैन के लिए सिर्फ दो बार अस्सातुलजामेअह कहकर नमाज इदैन के ऐलान करने की इजाजत है। मसअला- ईद व बक़रीद की नमाज़ का वक्त एक नेजह आफ़ताब बलंद होने के बाद से सूरज के ज्वाल के पहले तक है। मसअला- ईदे अजहा तमाम अहकाम में ईदुलफित्र की तरह है। ईदुलफित्र में नमाज़ से पहले कुछ खाना बेहतर है और इदेअजहा में नमाज से पहले कुछ न खाना बेहतर है। ईदुलफित्र की नमाज़ किसी उज्र की वजह से दूसरे दिन पढ़ी जा सकती है तीसरे दिन नहीं। ईदे अजहा की नमाज़ किसी भी उज्र की वजह से तीसरे दिन भी पढ़ी जा सकती है। (सामाने आखेरत स. 197) ईद की नमाज़ का तरीक़ा पहले इस तरह नियत करें कि नीयत की मैंने दो रकअत नमाज ईदुलफित्र या ईदुज्जुहा कि छः तकबीरों के साथ खास-वास्ते अल्लाह तआला के लिए (मुक्तदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के) मुँह मेरा तरफ काबा शरीफ के फिर कानों तक हाथ उठाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ नीचे बाँध लें फिर सना पढ़ें फिर कानों तक हाथ ले जाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ छो़ड़ दें फिर कानों तक हाथ उठाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ बाँध लें खुलासा यह है कि पहली तकबीर के बाद हाथ बाँध लें और फिर चौथी तकबीर के बाद हाथ बाँधें और दूसरी और तीसरी तकबीर के बाद हाथ छोड़ दें यानी सिर्फ दो बार हाथ छोड़ना है। चौथी तकबीर के बाद इमाम आहिस्ता से अऊज़ुबिल्लाह व बिस्मिल्लाह पढ़कर बलन्द आवाज से अलहमदो और कोई सुरत पढ़ें और रुकु और सजदा से फारिग़ होकर दूसरी रकअत से पहले अलहमदो और सूरत पढ़ें फिर तीन बार कानों तक हाथ उठाकर हर बार अल्लाहो अकबर कहते हुए हाथ छोड़ दे, और चौथी बार बिला हाथ उठाए तकबीर कहता हुआ रुकु में जाएँ। बाकी नमाज दूसरी नमाजों की तरह पूरी करे और सलाम फेरने के बाद इमाम दो खुतबे पढ़ें फिर दुआ माँगें। मसअला- पहले खुतबा शुरू करने से पहले नौ बार और दूसरे खुतबे से पहले सात बार और मेम्बर से उतरने से पहले चौदह बार अल्लाहो अकबर आहिस्ता कहना सुन्नत है। (दुर्रे मुख्तार स. 561) अल्लाह के प्रति समर्पण भाव प्रकट करने का त्योहार अल्लाह का शुक्र अदा करने का त्योहार रोजेदार बंदों को खुदा का हसीन तोहफा है ईदुल फितर |
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रात को नया चांद मुबारक
चांद को चांदनी मुबारक
फलक को सितारे मुबारक
सितारों को बुलंदी मुबारक
और आपको ईद मुबारक…
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