अल्लाह के हुक्म से चलती है दुनिया



SYED ASIFIMAM KAKVI 
JOINT SECRETARY 
ALRABTA EDUCATIONAL WELFARE TRUST 

अल्लाह पाक ने जिस तरह अपनी कुदरत से इस कायनात को बनाया है और इंसानों तथा जानवरों को पैदा किया है उसी तरह दुनिया के शुरू होने से लेकर कयामत तक अल्लाह पाक ही इस कायनात के निजाम को चलाता रहेगा। 

दुनिया की तमाम मखलूक पैदाइश से लेकर मौत तक अल्लाह पाक की मोहताज है। दुनिया अल्लाह के हुक्म से चल रही है। अल्लाह पाक हमारा मालिक है और हम सब उनके मोहताज हैं। 

हमारी भलाई इसी में है कि हम अल्लाह पाक के फरमा बरदार बने रहें तो हम दुनिया में भी खुशहाल रहेंगे और आखिरत में हमको जन्नत मिलेगी। हदीस शरीफ में आया है कि 'तीन लोगों की दुआ कभी खारिज नहीं होती, एक आदिल बादशाह, दूसरा कोई मजलूम शख्स और तीसरा रोजा खोलने से पहले रोजादार की दुआ।' 

मालूम हुआ कि सारा दिन रोजा रखने के बाद जब रोजादार अफ्तार के लिए दस्तरख्वान पर बैठता है, तो उस वक्त अल्लाह तआला की खास रेहमत उस पर होती है। ऐसे वक्त में उसकी दुआओं को कुबूलियत का दर्जा मिलता है। 

कहा गया है कि इसलिए इस वक्त को फालतू बातों में गंवाकर गुजारने की बजाए दुआएं करना चाहिए। कई लोगों को यह शिकायत होती है कि वह दुआएं करते हैं, लेकिन उसका असर दिखाई नहीं देता। 
इस पर कहा गया है कि कोई भी दुआ बेअसर नहीं होती, बल्कि उसकी तीन सूरतें होती हैं, या तो दुआ में मांगी गई चीज उसे मिल जाती है, या फिर मांगी गई चीज के बराबर कोई दूसरी चीज उसे 

दे दी जाती है और दोनों बातें पूरी न होने पर मांगी गई दुआ के बदले दुआ मांगने वाले के नामा-ए-आमाल में इतनी नेकियां जमा कर दी जाती हैं। यह नेकियां उसके लिए आखिरत के वक्त काम 

आती हैं। कहा जाता है कि मरने के बाद जब बंदा खुदा के सामने हाजिर होगा और उसे उसकी दुआओं के बदले मिलने वाली नेकियां गिनाई जाएंगी, तो उसके दिल से यही बात निकलेगी कि 

काश, उसकी कोई दुआ दुनिया में कुबूल ही न हुई होती, तो आज आखिरत में यह नेकियां उसके लिए काम आतीं।

इस दुनिया को एक दिन फना होना है और कयामत आएगी। इसलिए हर मुसलमान को कयामत के दिन अपने जीवन के कर्मों का हिसाब देने के लिए मुकम्मल तैयारी कर लेना चाहिए। मौत

सभी की आना है, वो कभी भी आ सकती है। इसलिए हम सबको आखिरत की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए।जो बंदे अल्लाह रसूल के बताए मार्ग पर चलकर जिंदगी गुजारेंगे उन्हें जन्नत 

मिलेगी। अल्लाह ने मगफिरत के लिए कलमा, नमाज, रोजा, हज और जकात रास्ते बताए हैं। इंसान इन मार्गों पर चलकर जन्नत की तैयारी कर सकता है।

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Tags: ASIFIMAM, KAKVI, SYED

Comment

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Comment by Gaurav Gupta on August 11, 2012 at 10:48am

ji sir kal janmastmi tha isliye kishan Bhagwaan chalaa rahe hai pukkkkkaaaaaaaaa yakin k sath kah raha hu

Comment by Munna Lal on August 10, 2012 at 10:54pm

Gaurav ji, why are you creating a situation in which Allah and Bhagwaan will start fighting with each other to decide which of the two really run the universe ?

Comment by Gaurav Gupta on August 10, 2012 at 4:09pm

update kar raha hu ji Bhagwan k hukm se chalti hai duniya subah sham ram naam japiye

Comment by Munna Lal on August 9, 2012 at 2:41pm
Kakvi sir Ji, your post read like Jehdi recruitment drive. Are you sir really serious ?
Comment by Munna Lal on August 9, 2012 at 2:39pm
Mr. Kakvi, I am amazed to read your post. I agree your mindset is not that of our ancestors who lived in stone age or bronze age. But certainly your thinking reveals you are still living in 18th. Century. Man, wake up and abandon your Allah, for it is 21st. Century, the world of Darwin, Einstin, Newton and Higg Boson God particle. Our world is of genes, stem cells, heart transplant. Internet and space travel. We have explored, there is no Allah, no paradise nor 70 virgins. Kakvi sir Ji, please try to live in present world of reality, not 7th. Century Arabia.

Munna Lal Kedia
M.A., M.A. (USA), M.B.A.

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