हाय दोस्तों ...ये मेरी एक गर्ल फ्रेंड की कहानी है..प्लीज बताना यार एसी गर्ल फ्रेंड के साथ क्या करना चाहिए......( अब तेरे साथ क्या नाता रखू अब tu ही बता ) - pura padna yaro...मैं अभी तक उस शौक़ से उबार…

हाय दोस्तों ...ये मेरी एक गर्ल फ्रेंड की कहानी है..प्लीज बताना यार एसी गर्ल फ्रेंड के साथ क्या करना चाहिए......( अब तेरे साथ क्या नाता रखू अब tu ही बता ) - pura padna yaro...
मैं अभी तक उस शौक़ से उबार नहीं पाया हूँ। आज सुबह से ही ये सोच कर मेरी तबियत बहुत खराब थी।
तुम भी कमाल के हो एक से एक नायाब घाव जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता अचानक ऐसा घाव दे देते हो। वो भी जब इसकी बिल्कुल उम्मीद ना हो।
कल रात घर जाते वक्त अचानक मेट्रो में मुझे रूहानी एहसास हुआ कि मैं तुम्हे खोने वाला हूँ। अब तक मेरे मन में एक आस थी कि शायद थोडा समय देने से तुम अपनी जंजीरें तोड़ दो।
आज सुबह होते ही मुझे कल जो कुछ भी हुआ वो समझ में आने लगा। मैं तुम्हारे और राम मिलान के संबंध के बारे में बात कर रहा हूँ। धीरे-धीरे जैसे तस्वीर साफ हुई मैं भौंचक्का रह गया। वरना तुम्हारे साथ बिस्तर पर बिताई पिछली रात की नज़दीकी से मेरी उम्मीद और ज़्यादा पक्की हो गयी थी।
जो - जो देखा यहाँ दोहरा रहा हूँ:

जब मैंने कहा था मैं तुम्हारे साथ सोऊँगा मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे साथ सोने से कत्राओगे। क्योंकि आज मैंने तुम्हारे मुताबिक तुम्हारे interest के बारे में कोई बात नहीं की थी। तुम मनोज जीं के पास सोने चले गए, मैं कुछ समझ नहीं पाया। सोचा मैं तुम्हारे पास अब तक नहीं सोया था इसी वजह से नाराज होगे।
पर अब जानता हूँ कि तुम इसलिये नहीं सोये थे क्योंकि तुम्हारे और राम मिलन के बीच वही दोस्ती हो गयी है जो कभी हमारे बीच थी। बल्कि उससे भी ज़्यादा। क्योंकि हम तो साथ सोने के लिए कितना तरसे थे। राम मिलान तो तुम्हारे साथ लगभग रोज़ सोता है।
कितना strange लगता है कि आज तुम्हारी वफ़ा मिलन के प्रति है। तुमने मुझे इतनी जल्दी अपना बीता हुआ कल बना दिया, जब कि मैं यहाँ तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था। तुम मेरे सामने राम मिलन के साथ सोने को तैयार थे, पर मेरे साथ सो कर मिलन को दुःख नहीं देना चाहते थी।
पर फिर तुम ये बर्दाश्त नहीं कर पाए कि मैं और मिलन साथ सोयें। और नीचे आ गए। जब मैं तुम्हारे पास सोया तो मिलन को बहुत बुरा लगा। जैसे मुझे लगता है। पर वो कुछ कर नहीं पाया। सुबह उसने शिक़ायत की, "दोस्त आपने मेरा साथ छोड़ दिया........ मेरे साथ नहीं सोये।" मैं उस समय नहीं समझ पाया।
फिर तुम उठे और ऊपर बिस्तर पर जाकर सो गए। रात को तुमने बहुत नज़दीकी दिखाई थी। अब ये व्यवहार मुझे समझ नहीँ आ रहा था। आज मैं वही कर रहा था जो तुम हमेशा से चाहते थे। बिना बोले तुमसे मस्ती करना।
मेरा सारा ध्यान तुम्हारी तरफ ही था। जब मिलम तुम्हारे पास से गुजरा तुमने लपक कर उसका हाथ थाम लिया और बडे प्यार से सहलाने लगे। तुम उसे मना रहे थे। अब उसने मेरी जगह ले ली थी।
वो तुम्हारे पास आकर चिपक कर बैठ गया पर ये आम लड़कों वाली नज़दीकी नहीं थी। वो तुम्हारे चेहरे की तरफ बड़ी कोमलता से झुका और मैं उठ कर तुम्हे देखने लगा। तुमने मुझे देखा और तुरंत अलग हो गए।
दिन में तुम उसके पास बैठे पर दूर होकर क्योंकि मैं देख रहा था। पर जब तुम मनोज जीं से चिपक कर गए और मैंने भी दीपक से चिपक कर तुमसे बदला लिया तो तुम ग़ुस्से में उससे पैर फंसा कर बैठ गए। मैं देख कर हैरान था। ये नज़दीकी हमारी वाली थी। आम दोस्तो में ऐसा नहीं होता।
जब मेरा ग़ुस्सा शांत हुआ तो मैं तुम्हे मनाने के लिए, और अपनी दोस्ती फिर से पक्की करने के लिए तुम से अपना पैर पहले की तरह सता लिया। तुम कुछ देर बैठे रहे पर फिर अलग हो गए। और जब मैं वहाँ से हटा तभी बैठे। तुम मुझे avoid कर रहे थे, पर क्यों ये नहीं समझ पा रहा था।
अब जानता हूँ कि तुम फिर से उस स्थिति में थे --- जैसा मेरे और मीनू के साथ साथ होने पर पैदा हुई थी। आज तुम मुझसे और मिलन, दोनों से दूर होकर इसे संभालना चाहते थे। तुम आज फिर दो नावों में सवार थे। तुम बिल्कुल नहीं बदले। वैसे आज मैं तो जबरदस्ती तुमसे चिपक रहा था।
मैंने दिन में कई बार तुमसे सटने की कोशिश की पर तुम हमेशा कुछ देर बाद उठ कर चले जाते।
पर आज जहाँ तुम मुझे दिन के उजाले में भी प्यार नहीं दे रहे थे, वहीं मिलन को अपना प्यार चुपके- चुपके दे रहे थे। तुम कभी-कभी अपनी बात कहने के लिए उसे बडे प्यार और कोमलता से हलके से छूते। तुमने सोचा मुझे पता नहीं चलेगा। पर मैं चौंक गया --- ये था तो हल्का सा टच पर इसमें वो घनिष्ठता साफ दिखाई दे रही थी जो कभी हमारे बीच थी।
याद है, जब तुम कार में मेरे पास नहीं बैठ पाते थे, और मुझसे सटने के लिए बेचैन होते थे तो बार- बार ऐसे ही बड़ी कोमलता से छूते थे।
इससे पहले कभी किसी लड़के ने मुझे ऐसे नहीं छुआ था --- मुझे ये टच बहुत अच्छा लगता था पर कुछ हैरान भी था। क्योंकि ये टच आम तौर पर लड़कियों करती हैं जब वो आप पर डोरे डालती हैं --- हल्का सा feathery टच।
ये सारी बातें धीरे-धीरे मेरे दिल के किसी कोने में रजिस्टर हो रही थीं पर मैं अभी सब बातों को जोड़ नहीं पाया था, भले ही मैं ने मजाक मजाक में कह दिया कि तुम और मिलन वैसे ही दोस्त/प्रेमी बन गए हो जैसे हम थे।
मुझे लगा मेरा इतना कहने से ही तुम उस से दूरी बाना लोगे-- कम कम से कम मेरे सामने और साबित करोगे कि मैं गलत हूँ और ये दोस्ती सिर्फ हमारे बीच ही है।
पर शाम को तुम्हारा व्यवहार और अजीब हो गया। तुम उल्टा और मिलन कि ओर जाने लगे । तुम उस से चिपके तो नहीं पर अपना पैर ऐसे लगा दिया कि उसका हाथ तुमसे सटता रहे। जब दो लड़के सटने के लिए बेक़रार हों और ना सट पायें तो ऐसा ही करते हैं। इससे तुम उसे थोडा धीरज भी बंधा रहे थे --- तुम्हें अभी तक समय नहीं मिल पाया था कल रात मेरे पास सोने की बात पर मनाने के लिए।
तुम उसे मनाने के लिए बेक़रार थे और चाहते थे मैं जल्दी चला जाऊं , बल्कि तुम तो चाहते ही नहीं थे कि मैं उसके सामने फिर आऊँ। क्योंकि तुमने अब दूसरा दोस्त ढूँढ लिया था । अब तुम्हें मेरी जरुरत नहीं थी ।
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि तुम चाहते थे कि मैं कवर का काम दिन मैं ही कर लूँ । अब समझा हूँ -----ताकि मैं रात में ना रुकूं ----- कम कम से कम मिलन के सामने नहीं।
तुम बेचैन हो रहे थे कि मैं जल्दी नहीं निकल रहा ------ बल्कि तुम्हें डर था कि मैं रूक ही ना जाऊं। कभी तुम मुझे रोकने के लिए तरसते थे ।
तुमने रात को पासवर्ड लिखते समय उसके आंख पर हाथ रखने के लिए बढाया पर मुझे देख कर रूक गए पर जिस ढंग से तुमने करा था इससे तुम्हारी नजदीकी और उससे सटने कि बेचैनी साफ झलक रही थी।
तुमने एक बार फिर उससे कुछ कहने के बहाने बड़ी कोमलता से उसके हाथ पर अपनी उँगलियों से पियानो बजाया। मैं बीच में कुछ सेकंड के लिए बाहर गया तो तुमने तुरंत उसके हाथों से अपना हाथ छुआ दिया। तुम्हारा बालों से भरा नंगा हाथ उसके हाथ से बड़ी ही sexy अंदाज़ में रखा हुआ था।
मुझे याद है जब हम मिले थे तो सर्दियाँ थीं और हम दोनो हमेशा पूरे ढके होते थे। तुम्हारे पैरों की नंगी उँगलियाँ छूने के लिए मैं तरसता था। तुम तो जब क्रौच से मेरे साथ चिपक जाते थे तब भी मैं तुम्हारे लिंग को महसूस नहीं कर पाता था। क्योंकि मैंने मोटा स्वेटर पहना होता था। मैंने एक पतला जैकेट ख़रीदा इसी मारे पर तुमसे फिर उस तरह सट नहीं पाया (क्योंकि मीनू का चक्कर सामने आ गया था) पर सर्दी खांसी ज़रूर लग गयी थी।
वहीं आज मिलन कितना खुस्नासीब था। जो मुझे नहीं मिल पाया वो इश्वर ने मिलन को दे दिया।
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