पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े तो बंद होगी बिक्री!
तेल कंपनियों ने अब अल्टीमेटम दे दिया है। सरकार उन्हें पेट्रोल के दाम बढ़ाने की इजाजत दे, नहीं तो वे बिक्री ही बंद कर देंगी। उनका घाटा इतना बढ़ चुका है कि अब कोई और विकल्प नहीं बचा है। कंपनियों का कहना है कि कीमत तय करने की आजादी मिलने के बावजूद उन्हें ऐसा नहीं करने दिया जा रहा है, जबकि पेट्रोल बिक्री पर प्रति लीटर सात रुपये से अधिक का घाटा हो रहा है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आरएस बुटोला ने सोमवार को कहा, 'हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। हम अब तेल खरीदने की भी स्थिति में नहीं है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 7.67 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। अगर इस पर बिक्री कर जोड़ दिया जाए तो दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत में 9.20 रुपये की वृद्धि करने की जरूरत होगी।'
बुटोला ने सरकार पर सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पेट्रोल पर ज्यादा टैक्स लगा कर कमाई कर रही हैं। दूसरी ओर तेल कंपनियों को मुनाफा कमाने नहीं दिया जा रहा है। तेल कंपनियों की कुल लागत का 93 फीसदी क्रूड खरीदने में चला जाता है। जब सारा उत्पादन घाटे में बेचने के लिए बाध्य किया जाएगा, तो फिर क्रूड कैसे खरीदा जाएगा। इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम संयुक्त तौर पर पेट्रोल पर रोजाना 48 करोड़ रुपये का घाटा वहन कर रही हैं।
मालूम हो कि पेट्रोल पर सबसे ज्यादा शुल्क वसूला जाता है। केंद्र सरकार प्रति लीटर पेट्रोल पर 14.78 रुपये की कमाई बतौर उत्पाद शुल्क करती है। राज्य सरकारें इस पर 25 फीसदी तक वैट लगाती हैं। मोटे तौर पर पेट्रोल की खुदरा कीमत का आधा हिस्सा सरकार के खजाने में जाता है। तेल कंपनियों ने अब इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है। बुटोला ने कहा कि, सरकार न तो हमारे घाटे की भरपाई कर रही है, और न ही खुदरा कीमत बढ़ाने की इजाजत दे रही है।
केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को जून, 2011 में पेट्रोल की खुदरा कीमत बढ़ाने की इजाजत दे दी थी। कंपनियों ने इसका इस्तेमाल दिसंबर, 2011 तक किया लेकिन उसके बाद चार राज्यों के चुनावों को देखते हुए सरकार ने वीटो लगा दिया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत लगातार 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल बनी रही। वर्ष 20011-12 में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर कुल 4500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, लेकिन सरकार ने इसकी भरपाई नहीं की। वैसे डीजल, रसोई गैस और केरोसिन पर हुए घाटे की भरपाई के लिए केंद्र सरकार की तरफ से तेल कंपनियों को पिछले वित्त वर्ष के दौरान 45 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं।
Started by Ragini Bhatiya in Bihar Politics. Last reply by shashikant pandey 3 hours ago. 66 Replies 4 Likes
Started by upendra sah in Bihar. Last reply by Sangeet Jha 10 hours ago. 5 Replies 0 Likes
Started by Raman Tiwari in Bihar. Last reply by Akhileshwar Singh 10 hours ago. 7 Replies 0 Likes
Posted by Suren Yadav on June 2, 2012 at 6:37pm 1 Comment 4 Likes
Posted by Dr. Nitish Priyadarshi on August 4, 2009 at 4:22pm 1 Comment 0 Likes
Posted by syed asifimam kakvi on June 26, 2010 at 7:18pm 0 Comments 0 Likes
© 2013 Created by Shalu Sharma.


You need to be a member of Bihar Social Networking and Online Community to add comments!
Join Bihar Social Networking and Online Community