कई बार सोचा तूझे परछाई का नाम दूँ... कई बार आईने के अक्स में तू दिखा......... परेशा परेशा से हुए है अब........... अब तो तू आब ओ हवाओं में भी दिखने लगा.......... मन्नतों में तेरी सिफारिश की नहीं थी...…

कई बार सोचा तूझे परछाई का नाम दूँ... कई बार आईने के अक्स में तू दिखा......... परेशा परेशा से हुए है अब........... अब तो तू आब ओ हवाओं में भी दिखने लगा.......... मन्नतों में तेरी सिफारिश की नहीं थी........ ... मगर मेरी हर दुआ की आज़माईश में तू दिखा......! हैरान हैरान हूँ न पुछ क्यों खुद से अंजान हूँ........ चोरी चोरी नज़रे उसकी नजरो से मिली....... रूठा सा था दिल..... फिर भी तू धड़कनो में मिला....!

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Comment by Gaurav Gupta on March 23, 2012 at 11:09pm
acha hai

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