Abhay Kant Jha Deepraaj
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RANJEET YADAV commented on Abhay Kant Jha Deepraaj's blog post GHAZAL - 11
"thanks for sayari"
Apr 29, 2011
Abhay Kant Jha Deepraaj posted a photo
Apr 23, 2011
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Dec 31, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj left a comment for jayant kumar singh
"Jayant Kumar Singh Jee, Aap ko bhee nav varsh kee mangalmay shubh kamanaa. Abhay Deepraaj"
Dec 30, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj commented on Mukund Jha's photo
Dec 26, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj left a comment for LOKESH PATHAK
"Dear Lokesh, welcome of you on you bihar - bihar social network. Abhay ........"
Dec 26, 2010
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GHAZAL - 7

ग़ज़ल जाने  क्या , ये  हो  गया  है, आजकल   इंसान   को | गलियां   देता   है   वो  माँ-बाप   और  भगवान्  को || सर्जना   और  सर्जकों  को   कर   तिरस्कृत   आदमी, पूज्य  कहकर   पूजता  है   आज   वह   शैतान   को || छुद्रताओं   से   ढँकी  है   मानसिकता   इस   तरह, गर्व  हम  कहने  लगे  हैं  आजकल   अभिमान   को || क्रांति  कहकर  के  घृणा  का  बीज  बोते  फिर  रहे, व्यर्थ  अब  हम  कह  रहे  हैं - धर्म  और  ईमान  को || न्याय और संस्कार, संस्कृति, देश की क्या बात अब, बेचते  है  हम  तो  सिक्कों   के   लिए  …See More
Dec 22, 2010
jayant kumar singh commented on Abhay Kant Jha Deepraaj's blog post GHAZAL - 6
"दीपराज जी, आपके ग़ज़ल मैं एक दर्द का एहसास होता है. जिंदगी गम और खुसिओं का मिश्रण होता है. गम को परास्त कर खुसिओं का रास्ता दिखानें और जिंदगी जीने कि जज्बा पैदा करने वाला ग़ज़ल रचिए."
Dec 21, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj posted a blog post

GHAZAL - 6

                         ग़ज़ल  दुनिया के कुछ लोगों के लिए मेरी सूरत इतनी काली है |जिसके जीने पर मातम है और मौत पे एक दीवाली है || शायद मैं उन्हीं के हिस्से की साँसों को चुरा कर जीता हूँ,इसलिए ही शायद पानी का भी, बर्तन उनका खाली है || मैं भी अपनी माँ का बेटा अपनी बहनों का भाई हूँ ,पर, जाने क्यों मेरे हर हक पर, उनकी आँख सवाली है || ये धरती भी, वो अम्बर भी या खुदा उन्हीं का कैसे है ?कोई तो मुझे ये समझाए, क्यों उनकी नज़र मतवाली है || मुझको वो ज़हर कहते है पर , कुछ मेरे भी वो हमदम हैं, जो मुझे प्यार से…See More
Dec 20, 2010
Wasif Gilani commented on Abhay Kant Jha Deepraaj's blog post GHAZAL - 4
"Khub Bahut Khub Apki soch m ek gahrayi h jo samaj ko jodti h."
Dec 18, 2010
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Dec 17, 2010
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GHAZAL - 3

ग़ज़लकभी - कभी इन्सां अपनी भी सूरत से डर जाता है |कुछ खुशियाँ ऐसी होती हैं जिनसे ये दिल भर जाता है ||कुछ फूलों की रौनक भी आँखों को यूँ पथरा देती हैं,खुद ही जिसके गम से इन्सां दिल, जीते जी मर जाता है ||कुछ घड़ियाँ ऐसी होती हैं, कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनके न होने से ज्यादा, होने का गम तड़पाता है ||शायद वो ये सोचेंगे - उनका प्यार मुझे गम देता है ,झूठ है ये पर ये भी सच है- दिल उनसे कतराता है ||चाहत भी एक मजबूरी है, नफरत भी एक मजबूरी है,दूरी ही शायद मिलने की खुशियों को और बढाता है ||दिल के गमगीं या…See More
Dec 15, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj posted blog posts
Dec 14, 2010
Abhay Kant Jha Deepraaj and ashutosh narayan are now friends
Dec 14, 2010

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GHAZAL - 1

                   ग़ज़ल

मैं एक विद्रोही इन्सां हूँ क्योंकि मैं कमज़ोर नहीं हूँ |
ज्वाला है मेरी आँखों मैं क्योंकि मैं कोई चोर नहीं हूँ ||

मैंने जो  भी  कड़वा  मीठा  देखा  भोगा  कह डाला,
क्योंकि मैं एक जिंदा इन्सां हूँ कोई मुर्दा दौर नहीं हूँ ||

मैंने  ये  शिक्षा  पाई  है  सिद्धांतों  के  लिए  जिओ,
जो  बसंत  को  बहलाने को नाचे मैं वो मोर नहीं हूँ ||

मुझे  पाप  के  झंझावातों  से  टकराना  भाता  है,
आंधी-पानी जिसे मिटा दे मैं वो दुर्बल बौर नहीं हूँ ||

जब भी और जहाँ भी मुझको सच और न्याय पुकारेगा,
मुझे वहीँ पर पाओगे तुम क्योंकि मैं रणछोड़ नहीं हूँ ||

ईश्वर  जितनी  मुझे  रौशनी  देगा, मैं  सबमें  बांटूंगा,
कोई छाया जिस प्रकाश को ढक ले मैं वो भोर नहीं हूँ ||


                 रचनाकार - अभय दीपराज


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GHAZAL - 10

Posted on December 31, 2010 at 9:19pm 0 Comments

ग़ज़ल



गिर  गया  है  आदमी  यूँ  आज  अपनी  ज़ात से |

फिर  रहा  है  हर  कदम पर, वो ज़ुबां से, बात से ||



सत्य  से  अब  हो  गयी  है,  शत्रुता  इंसान  की,

इसलिए, वो  वार  इस  पर  कर  रहा  है, घात से ||



सच, परीक्षा  की  घड़ी  है,  आजकल  ये  धर्म की,

लड़  रहा  है  धर्म  जिसमें, आज  काली  रात  से ||



झूठ  से  और  पाप  से  है,  प्यार  यूँ  इंसान  को,

गूँज  युग  को  दे  रहा  वो, अब इन्हीं नगमात से…
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GHAZAL - 9

Posted on December 31, 2010 at 8:45pm 0 Comments

                     ग़ज़ल



मेरे  दिल में  गम  का सागर और गम की ही बातें हैं |

खुशियों  के  दिन  बेहद  छोटे,  लम्बी,  काली रातें हैं ||



दुनिया में जो मैंने देखा,  कह  पाना  नामुमकिन  है ,

नज़र  यहाँ  पर  ज़हरीली  है, गहरी  जिनकी घातें हैं ||



रिश्तों का तो नाम यहाँ पर,  लेना  एक  कडवाहट  है,

दुश्मन वो ही यहाँ बड़े हैं,  जिनसे   दिल  के  नाते  है ||



कहते  हैं ये - ईश्वर  ने  ये  अपना  चमन  बसाया …
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GHAZAL - 8

Posted on December 31, 2010 at 1:00am 0 Comments

ग़ज़ल



गुमराह होता जा रहा इस प्रकृति का सतवंत है |

मर  रही   इंसानियत,  हैवानियत   बे-अंत   है ||



हो  रही  निर्वस्त्र,  मानवता  की  सीमा  द्रौपदी,

युद्ध का  आसार  ही,  हर  ओर  अब  जीवंत  है ||



हैं अधिकतर बाग़ अब अन्याय के अधिकार में,

बन गया जो आज अपना,  पूज्यवर भगवंत है ||



एक से सौ, जुर्म का ज्वर संक्रमण बन बढ़ रहा,

राम  भी  अदृश्य  हैं,  अदृश्य   ही   हनुमंत   है ||



नवजात शिशुओं का हुआ…
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GHAZAL - 7

Posted on December 22, 2010 at 2:07am 0 Comments

ग़ज़ल



जाने  क्या , ये  हो  गया  है, आजकल   इंसान   को |

गलियां   देता   है   वो  माँ-बाप   और  भगवान्  को ||



सर्जना   और  सर्जकों  को   कर   तिरस्कृत   आदमी,

पूज्य  कहकर   पूजता  है   आज   वह   शैतान   को ||



छुद्रताओं   से   ढँकी  है   मानसिकता   इस   तरह,

गर्व  हम  कहने  लगे  हैं  आजकल   अभिमान   को ||



क्रांति  कहकर  के  घृणा  का  बीज  बोते  फिर  रहे,

व्यर्थ …

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At 5:07pm on December 6, 2010, jayant kumar singh said…
आपकी ग़ज़ल दिल को छूता है. आपकी आवाज़ ग़ज़ल के रूप मे आपके दिल से बाहर आता है. आप उस समाज की कल्पना करते हैं जब राजनिति नहीं बनी होगी. आज की समाज राजनीति के दलदल से ग्रसित है. पैसा ही सबकुछ हो गया है. चुनाव मे बाप और बेटे अलग अलग पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ते है. जनता और समाज को मुर्ख बनाते है. उनका केवल एक ही ध्येय रहता है कि सत्ता और पैसा कैसे हासिल करें. मानवता ,आदमियता, सामाजिकता आदि का परिभासा उनके लिए भावनात्मक बेबकूफी और मुर्खता है. बिगत बिहार के चुनाव में भी ये बात देखने को मिली है. हम आपकी भावना कि क़द्र करते हैं. हम चाहते हैं कि आपकी भावना इस मंच से अधिक से अधिक सदस्यों तक पहुचे और कुछ तो अच्छी सुरुआत कहीं से हो.
At 11:17pm on November 23, 2010, jayant kumar singh said…
your gazal's are good and mirror of honesty. we should think to our society and not only our family.
 
 
 

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Started by Ram Prakash in Bihar. Last reply by Rajan Tiwari 6 minutes ago. 11 Replies

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Started by Samvad HIV/AIDs helpline in Bihar 1 hour ago. 0 Replies

Bihar is country's fastest growing state at 13.1%

Started by Ragini Bhatiya in Bihar Development. Last reply by Shalu Sharma 1 hour ago. 2 Replies

I find such pictures very inspiring!!

Started by sanjay kumar pandey in Bihar. Last reply by Ragini Bhatiya 6 hours ago. 6 Replies

nitish kumar is not able to bihar goverment,,,,,,,

Started by rizwan khan in Bihar. Last reply by CHALU CHAMAR 7 hours ago. 37 Replies

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