दिल्ली की बिल्ली हमने भी देखा॥
दिल्ली की हमने बिल्ली देखा॥
जो एकदम से काली थी॥
बेईमानी की चुपडी खाती॥
उसकी शान निराली है॥
सच्चाई से नफरत करती ॥
अत्याचारी से करे मिलाप॥
दिन दहाड़े चोरी करवाती॥
सीधी जनता करे विलाप॥
उसकी मीठी बोली में ॥
काली करतूत का छुपा है लेखा॥
दिल्ली की बिल्ली हमने भी देखा॥
हर चौराहे पर खड़े सिपाही॥
फ़िर भी घटना हो जाती है॥
बिन ब्याह की यहाँ कुवारी ॥
कैसे माँ बन जाती…