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पटना में आप का स्यागत है। 

train se aa rahe hai to juta moja nikaal ke station se bahar aaiyega auto me baithiyega to rumaal muh pe baandh lijiyega station se bahar ate hi saara ilaka avayvasthit aur gandgi se bahraa hai hanuman ji ke mandir ke aspas ki saari jagah 1960 ke hisab se vayvasthit hai devanand sahab ji ke welcome ke liye taiyaar khadi hai aj ke super stars aa jaaye to bhul ke dobaara nahi aayenge patna jab vo station se bahar ki gandagi aur avayvashit halaat dekh le to jai hind jai bihar

गौरव भाई, आप जो हालात और हालत बता रहे हैं, वही छोड़ कर तो मैं पटना से बाहर गया था. लेकिन 'सुसाशन' का बड़ा नाम सुना तो इच्छा हुयी की अपने जन्मस्थली के दर्शन के लिए चलना चाहिए. आप जो स्थिति बता रहे हैं अगर वही सच है तो यकीन मानिए की मैं 'सुसाशन' की पोल सोशल वेबसाईटों पर जरुर खोलूँगा. आदत के अनुरूप अपने साथ विडियो कैमरा और डिगिटल कैमरा भी ले जा रहा हूँ, कोशिश ये होगी की पटना की तस्वीर लोगों के सामने आये. 

लेकिन एक बात यह भी कहूँगा की पटना का भौतिक परिवर्तन एवं विकास कुछ पल के लिए मन को खुश तो करता है लेकिन "पुराना पटना" की याद हमेशा बरकरार रहती है. मोहल्ले को होटलों में सुबह-सुबह कचौड़ी-जिलेबी और रसदार सब्जी का स्वाद लेना. शाम में गरमा-गरम समोसे का लुत्फ़ लेना. अंटाघाट के झोपड़ीनुमा दूकान में लिट्टी-चोखा-चटनी खाना. गांधी मैदान में बैठकर ढोल की थाप पर अल्ला-उदल की कहानी सुनना और चिनियाबदाम फोड़ना. बाकरगंज के रूपक सिनेमा वाली गली में 'बम' का स्वाद लेना.........और न जाने कितनी ही बातें.......अपने स्कूल (सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, गाँधी मैदान) में भी जाऊँगा अपने बचपन की यादों को ताजा करने और पुराने शिक्षकों से मिलकर उनका आशीर्वाद लेने. 
मेरे लिए तो पटना एक शहर ही नहीं है बल्कि माँ का आँचल है, जिसमें मैं पला-बढ़ा और आज इस मुकाम पर पहुंचा. अगर वो आँचल गन्दा है तो गन्दा ही सही लेकिन वो अपनी माँ का आँचल है........ये क्या कम है ?

Actually halat bhi itna bura nahi hai. Lekin gandagi tho hamesha rahti thi.

सर गौरव् का काम टोल मोल कर परफेक्ट बात करना है मैं भी 4 से 5 महीने पहले पटना गया था स्टेशन से बाहर निकलते ही जो नजारा मुझे दिखा वो ही बता रहा हु आपको बाकि पटना भी घुमा क्या क्या बताऊ आपको वेसे भी आप तो बारिश के मौसम में आ रहे है बिहार के लोगो को थोड़ा सा विकास दिखा दिया जाए तो खुश हो जाते है सर आपको ये भी बता दू की दिल्ली वाले को दिल्ली प्यारा है मुंबई वाले को मुंबई और अहमदाबाद वाले को अहमदाबाद इंदौर वाल;इ को इंदौर भोपाल वाले को भोपाल लखनऊ वाले को लखनऊ और इन्सारे राज्यों के छोटे शहर आपको पटना यानि आपकी मातृभूमि से हालात कई गुना बेहतर है जी एक बड़े राज्य जो की पुरे भारत के वास्तविक इतिहास को समावेसित करता है उसके राज्या की राजधानी का ये हाल है कुछ फलाई ओवेर्स मल्टीप्लेक्स पार्क्स बन गए है देख के खुश हो जाइएगा लेकिन दुसरे राज्यों के के विकास से तुलना मत  कीजियेगा नही  तो निराश हो जायेंगे उम्मीद है की आप भी बिहार का विकास उसी तरह होता देखना चाहते होंगे या फिर उससे भी बेहतर होता देखना चाहते होंगे मेरे ख़याल में urbanisation  और infrastructure के मामले में बिहार का विकास संतोष जनक नहीं है और please समोसा लिट्टी जलेबी नुक्कड़ की चाय ये ओ कर के विकास के मुद्दे उससे मत तोलें भारत के गली गली में ये सारी   चीज़े मिलती है और अधिकांस लोगो को ये चीज़े पसंद है शायद मैं आपके कुछ रेप्लिएज़  का जवाब ना दे पाऊं  sorry  for that 

RAJ said:

गौरव भाई, आप जो हालात और हालत बता रहे हैं, वही छोड़ कर तो मैं पटना से बाहर गया था. लेकिन 'सुसाशन' का बड़ा नाम सुना तो इच्छा हुयी की अपने जन्मस्थली के दर्शन के लिए चलना चाहिए. आप जो स्थिति बता रहे हैं अगर वही सच है तो यकीन मानिए की मैं 'सुसाशन' की पोल सोशल वेबसाईटों पर जरुर खोलूँगा. आदत के अनुरूप अपने साथ विडियो कैमरा और डिगिटल कैमरा भी ले जा रहा हूँ, कोशिश ये होगी की पटना की तस्वीर लोगों के सामने आये. 

लेकिन एक बात यह भी कहूँगा की पटना का भौतिक परिवर्तन एवं विकास कुछ पल के लिए मन को खुश तो करता है लेकिन "पुराना पटना" की याद हमेशा बरकरार रहती है. मोहल्ले को होटलों में सुबह-सुबह कचौड़ी-जिलेबी और रसदार सब्जी का स्वाद लेना. शाम में गरमा-गरम समोसे का लुत्फ़ लेना. अंटाघाट के झोपड़ीनुमा दूकान में लिट्टी-चोखा-चटनी खाना. गांधी मैदान में बैठकर ढोल की थाप पर अल्ला-उदल की कहानी सुनना और चिनियाबदाम फोड़ना. बाकरगंज के रूपक सिनेमा वाली गली में 'बम' का स्वाद लेना.........और न जाने कितनी ही बातें.......अपने स्कूल (सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, गाँधी मैदान) में भी जाऊँगा अपने बचपन की यादों को ताजा करने और पुराने शिक्षकों से मिलकर उनका आशीर्वाद लेने. 
मेरे लिए तो पटना एक शहर ही नहीं है बल्कि माँ का आँचल है, जिसमें मैं पला-बढ़ा और आज इस मुकाम पर पहुंचा. अगर वो आँचल गन्दा है तो गन्दा ही सही लेकिन वो अपनी माँ का आँचल है........ये क्या कम है ?

गौरव भाई, ना तो मैंने आपकी बातों का बुरा माना है और कृपया आप भी मेरी बातों का बुरा ना मानें, मेरी भावनाओं को समझें. मैं समझ सकता हूँ आपकी भावनाओं को, आपने वही कहा जो आपने देखा है. बिहार के बाहर के लोग 'सुशासन' के बारे में अखबारों में सुनते रहते हैं. मुझे भी वो सच्चाई देखने और समझने को मिल जायेगी. आपने जो व्याख्या किया है उसके अनुसार मैं भी सहमत हूँ की विकास के नाम पर कुछ खुबसूरत इमारतों को खड़ा करने से ही विकास नहीं हो जाता. विकास के लिए पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के साथ-साथ जन-सुविधायें भी सहज और सरल बनाने की आवश्यकता होती है. इन सबसे भी ज्यादा जरुरी होता है वहाँ के लोगों की विकसित मानसिकता का भी अन्यथा खुबसूरत चीजें भी लोग बर्बाद करने में और गन्दा करने में नहीं हिचकते. 

मैं तो पटना जा रहा था अपने अग्रज एवं बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो. रविकांत दुबे जी से मिलने के लिए, हाल ही में एक दुर्घटना में उनको काफी चोटें आई हैं. लेकिन आपकी बात को समझ कर मुझे लगता है की मेरा यह पटना दौरा एक अलग रुख अख्तियार करने जा रहा है. अब मुझे पटना ही नहीं बल्कि बिहार की राजधानी पटना के आसपास के ग्रामीण इलाकों का भी दौरा करना पड़ेगा, जिस से की लोग ये जान सकें की बिहार के विकास की सत्यता मात्र राजधानी तक ही सिमित है या फिर राजधानी से बाहर निकल कर ग्रामीण इलाकों तक भी अपनी पहुँच बना पायी है.
आपने जो जानकारी दिया उसके लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ क्योंकि आपके जानकारी के माध्यम से मुझे यह प्रेरणा मिली की मैं इस यात्रा में बिहार के विकास की सत्यता से भी रूबरू हो सकूँ.



Gaurav Gupta said:

सर गौरव् का काम टोल मोल कर परफेक्ट बात करना है मैं भी 4 से 5 महीने पहले पटना गया था स्टेशन से बाहर निकलते ही जो नजारा मुझे दिखा वो ही बता रहा हु आपको बाकि पटना भी घुमा क्या क्या बताऊ आपको वेसे भी आप तो बारिश के मौसम में आ रहे है बिहार के लोगो को थोड़ा सा विकास दिखा दिया जाए तो खुश हो जाते है सर आपको ये भी बता दू की दिल्ली वाले को दिल्ली प्यारा है मुंबई वाले को मुंबई और अहमदाबाद वाले को अहमदाबाद इंदौर वाल;इ को इंदौर भोपाल वाले को भोपाल लखनऊ वाले को लखनऊ और इन्सारे राज्यों के छोटे शहर आपको पटना यानि आपकी मातृभूमि से हालात कई गुना बेहतर है जी एक बड़े राज्य जो की पुरे भारत के वास्तविक इतिहास को समावेसित करता है उसके राज्या की राजधानी का ये हाल है कुछ फलाई ओवेर्स मल्टीप्लेक्स पार्क्स बन गए है देख के खुश हो जाइएगा लेकिन दुसरे राज्यों के के विकास से तुलना मत  कीजियेगा नही  तो निराश हो जायेंगे उम्मीद है की आप भी बिहार का विकास उसी तरह होता देखना चाहते होंगे या फिर उससे भी बेहतर होता देखना चाहते होंगे मेरे ख़याल में urbanisation  और infrastructure के मामले में बिहार का विकास संतोष जनक नहीं है और please समोसा लिट्टी जलेबी नुक्कड़ की चाय ये ओ कर के विकास के मुद्दे उससे मत तोलें भारत के गली गली में ये सारी   चीज़े मिलती है और अधिकांस लोगो को ये चीज़े पसंद है शायद मैं आपके कुछ रेप्लिएज़  का जवाब ना दे पाऊं  sorry  for that 

RAJ said:

गौरव भाई, आप जो हालात और हालत बता रहे हैं, वही छोड़ कर तो मैं पटना से बाहर गया था. लेकिन 'सुसाशन' का बड़ा नाम सुना तो इच्छा हुयी की अपने जन्मस्थली के दर्शन के लिए चलना चाहिए. आप जो स्थिति बता रहे हैं अगर वही सच है तो यकीन मानिए की मैं 'सुसाशन' की पोल सोशल वेबसाईटों पर जरुर खोलूँगा. आदत के अनुरूप अपने साथ विडियो कैमरा और डिगिटल कैमरा भी ले जा रहा हूँ, कोशिश ये होगी की पटना की तस्वीर लोगों के सामने आये. 

लेकिन एक बात यह भी कहूँगा की पटना का भौतिक परिवर्तन एवं विकास कुछ पल के लिए मन को खुश तो करता है लेकिन "पुराना पटना" की याद हमेशा बरकरार रहती है. मोहल्ले को होटलों में सुबह-सुबह कचौड़ी-जिलेबी और रसदार सब्जी का स्वाद लेना. शाम में गरमा-गरम समोसे का लुत्फ़ लेना. अंटाघाट के झोपड़ीनुमा दूकान में लिट्टी-चोखा-चटनी खाना. गांधी मैदान में बैठकर ढोल की थाप पर अल्ला-उदल की कहानी सुनना और चिनियाबदाम फोड़ना. बाकरगंज के रूपक सिनेमा वाली गली में 'बम' का स्वाद लेना.........और न जाने कितनी ही बातें.......अपने स्कूल (सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, गाँधी मैदान) में भी जाऊँगा अपने बचपन की यादों को ताजा करने और पुराने शिक्षकों से मिलकर उनका आशीर्वाद लेने. 
मेरे लिए तो पटना एक शहर ही नहीं है बल्कि माँ का आँचल है, जिसमें मैं पला-बढ़ा और आज इस मुकाम पर पहुंचा. अगर वो आँचल गन्दा है तो गन्दा ही सही लेकिन वो अपनी माँ का आँचल है........ये क्या कम है ?

शालू जी, नमस्कार और आभार व्यक्त करता हूँ आपके अभिनन्दनपूर्ण भावनाओं के लिए. 

Shalu Sharma said:

पटना में आप का स्यागत है। 

Mr. Raj

May I give you some advise whle you are in Patna ? Here they are.

1. Always wear face mask. To stop "Dushit vaayu" from garbage, drains, roting dead dogs, faeces from road side getting into your nose. Also to protect you from dust, petrol - disel  toxic fumes.

2. Do not eat from food stall by roadside. Otherwise you will only enrich Patna quacks who claim to be doctors.

3. Wear dhoti - Kurta, chew paan and spit where you like. Speak local dialect. You must behave like natives of Patna. Otherwise, you risk being kidnapped.

4. Do not walk on roads. You will get run over.

5. Law and order is "Ram Bharose" in Bihar and especially Patna. So try to get home no later than 8 PM.

6. Never get anywhere near a policeman. You can never imagine what he will do to you.

7. Don't walk near any young girl. They are always stalked by youngmen for a chance to rape them. They might mistake you for her guardian and you may come to some physical grief. If you do see something fishy happening, do not try to help. Phone the police and give a fake name.

8. Never ride a city bus. They are coffins on the wheels.

9. Try not using ATM, unless it is inside the bank. Those outside ones could have camera, copying devise fitted to it. So, be safe.

10. Finally, enjoy your stay, provided you are not frightened by my sane advise.

Munna Lal Kedia

MA, MA (usa), MBA

Patna is a dirty city. the stench on the platform is so bad that I dont bother travelling with trains anymore. I now fly straight to patna from delhi. 

ha ha ha.............thanx a lot munna bhayi.........jo sthiti aapne bataaya hai uske mutaabik mera Patna aaj bhi waisa hee hai jaisa main chhor kar gaya tha. chaliye mujhe bhi achchha lagega apne PURAANE PATNA ko fir se dekhkar.

Munna Lal said:

Mr. Raj

May I give you some advise whle you are in Patna ? Here they are.

1. Always wear face mask. To stop "Dushit vaayu" from garbage, drains, roting dead dogs, faeces from road side getting into your nose. Also to protect you from dust, petrol - disel  toxic fumes.

2. Do not eat from food stall by roadside. Otherwise you will only enrich Patna quacks who claim to be doctors.

3. Wear dhoti - Kurta, chew paan and spit where you like. Speak local dialect. You must behave like natives of Patna. Otherwise, you risk being kidnapped.

4. Do not walk on roads. You will get run over.

5. Law and order is "Ram Bharose" in Bihar and especially Patna. So try to get home no later than 8 PM.

6. Never get anywhere near a policeman. You can never imagine what he will do to you.

7. Don't walk near any young girl. They are always stalked by youngmen for a chance to rape them. They might mistake you for her guardian and you may come to some physical grief. If you do see something fishy happening, do not try to help. Phone the police and give a fake name.

8. Never ride a city bus. They are coffins on the wheels.

9. Try not using ATM, unless it is inside the bank. Those outside ones could have camera, copying devise fitted to it. So, be safe.

10. Finally, enjoy your stay, provided you are not frightened by my sane advise.

Munna Lal Kedia

MA, MA (usa), MBA

Rohini ji

Namaskar,

thanx a lot for the suggestion I will take care. Train se chalney kaa apna ek alag hee maja hai. Mughalsarai station par utarkar garma garam chaay ki chuski ke saath apne raajya mein pravesh kaa romaanch hee alag hota hai. Ek gajab ki taazagi, sfurti, utsaah aur umang ka milajula anubhaw hota hai. Chausa station ke baad se train ke dono taraf ke agriculture land, villages aur logon ko dekhkar aisa lagta hai jaisey main apney ghar-gaon mein aa gaya hoon. Samay ki killat hoti hai to main by air travel karta hoon lekin jab bhi bihar ki baat ho to main barey itminaan se program banata hoon aur train se hee safar karta hoon. Halaanki bhishan garmi mein sleeper compartment mein safar karna mushkil ho jaata hai isliye ac class mein safar karna majburi hai otherwise sleeper class mein safar kaa maja hee kuchh aur hai. apne logon ke beech apne raajya ke halaat aur haalat ke baarey mein khoob jamkar gappein hoti hain aur safar ke mushkilon aur samay kaa pata hee nahin chalta.
Rohini said:

Patna is  a dirty city. the stench on the platform is so bad that I dont bother travelling with trains anymore. I now fly straight to patna from delhi. 

Munna lala kedia aap apne bihar se bahut hee pyar karte hai. 

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