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Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 1, 2012 at 12:09pm
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 1, 2012 at 6:42pm
Permalink Reply by Shalu Sharma on May 2, 2012 at 1:55pm Very interesting Gaurav ji, aap politics kab join kaar rahe hai.
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 29, 2012 at 7:26pm शालू माम शायद 2014 में जब मुझे लोकसभा के चुनाव में खड़े होनेक के लिए कोई अच्छा ऑफर मिल जाए और मेरे विचारो से मिलती किसी पार्टी की कृपा मुझे प्राप्त हो जाए हा हा lo वैसे as a idopreneur work कर रहा हु मतलब जो लोग idea and ideology की खेती करते है every thing depend success.विकास की प्रक्रिया जरी है गौरव के तरकस में एक से बढ़कर एक ideas है
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 29, 2012 at 7:41pm मानव संसाधन मंत्री श्री कपिल सिब्बल जी का शिक्षा वित् निगम क गठन का प्रस्ताव सही है शिक्षा के क्षेत्र में समाजवाद का सिधांत अपनाया जाना चाहिए मोंटेक अहलुवालिया जी केवलअमेरिका क पूंजीवादी सिधांत से inspire है जहा किसी भी तरह से पैसे बनाने की सोच हावी रहती हैं इंडिया अभी विकास के दौर से गुजर रहा है किसी देश का विकास वहा क हिसाब से होना चाहिए भारत की इकोनोमी मिक्स इकोनोमी है यहाँ का चाइना के समाजवाद के सिधांत का overdose भी नहीं है ये चाइना क लिए ठीक है भारत मे शिक्षा के क्षेत्र में तीव्र सुधार के लिए शिक्षा वित् निगम के गठन का प्रस्ताव ठीक है
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 29, 2012 at 7:46pm शिक्षकों की तनख्वाह बढाने की योजना भी ठीक है quality education पाने और देने दोनों में कारगर होगा
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 29, 2012 at 8:06pm Engineering colleges admission के लिए single common टेस्ट का फैसला भी ठीक है स्टुडेंट्स का ज्यादा टाइम तैयारियो और भटकाव में गुजर जाता है बेहतर है की colleges universities institution rank के आधार पे admission ले अपने counselling को मजबूत करे अपने personal टेस्ट भी conduct कराए institutions universities colleges school खुद आपस में पर्तिस्पर्धा करे quality के education परोसे अपने surroundings को बेहतर competitive बनाए education bodies को अपना seprate टेस्ट conduct करने का अधिकार है ताकि वो अपनी गुणवत्ता बनाए रखे।
Permalink Reply by satyender kumar on May 30, 2012 at 11:43am हमारे देश के लोगो में अनुशाशन को लतियाकर जुगाड़मेंट का फंडा अपनाने की जो एक घटिया प्रवृति पाई जाती है ! इसे दूर करने में लगभग कितना
समय लगेगा और इसे कैसे दूर किया जायेगा ! इस पर कोई रिसर्च करना चाहोगे ??????
यदि हाँ तो रिपोर्ट लेने कब आऊं बता देना !
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 30, 2012 at 7:44pm सत्येन्द्र जी अभी आपको और इनपुट्स provide कराने चाहिए थे की अप किस सन्दर्भ में कहना या पूछना चाहते है फिर जिन भावनाओ को आधार बना के अपने सवाल पूछा है उस आधार पे कहना चाहूँगा की ये एक लम्बी बिमारी है इसका निदान इतना जल्दी संभव नहीं है इसमें एक लम्बे शोध और प्रयोगों की जरुरत है जिसमे काफी खर्चा हो जाएगा फिर भी कुछ तात्कालिक समाधान और दवाइआ मुहैया कराई जा सकती है । जैसे अछि फसल तैयार करे सिस्टम को एफ्फेक्टिवे बनाए सरकारी क्षेत्र में भी कॉरपोरेट स्टाइल में काम हो quality के काम हो ब्रांडेड चीजों पे ध्यान दिए जाए जिसके जेब में पैसे नहीं है या कम है वो नॉन ब्रांडेड चीज़े भी खरीद सकता है । technology का इस्तेमाल हो । देशभक्त लोगो को सम्मान मिले pension भी मिले । किसी भी field में मोरल बूस्टर भी हो । अनुशासन तोड़ने वाले को कानून के दायरे में लाये जल्द कार्यवाई हो आपके सिमित सवाल का इतना ही सिमित जवाब है फ़िलहाल तो ।
Permalink Reply by satyender kumar on May 31, 2012 at 11:04am जब हमारे दिमाग में कोई चीटी काटे तो समझना चाहिए की कही न कहीं अनुशाशन की अवहेलना हो रही है ! चाहे हमारी तरफ से हो या किसी और की तरफ से ! जुगाड़मेंट भी ऐसा ही एक तत्व है जिसके कारण हर किसी के दिमाग में कभी न कभी कोई चीटी जरुर काटती है ! अब जानते है जुगाड़ मेंट के बारे में,आपने देखा होगा एक व्यक्ति किसी कार्य के लिय घंटो पंक्ति (लाइन)में खड़ा होता है दूसरा उसी कार्य को घर बैठे या बिना पंक्ति में खड़े हुए करवा लेता है ! एक व्यक्ति जो सरकारी कर्मचारी है उसका स्थान्तरण (ट्रान्सफर ) हर साल या साल में दो तीन बार हो जाता है दूसरा कर्मचारी पंद्रह साल से एक ही सहर में कार्यरत होता है ! इसे कहते है जुगाडमेंट का फंडा ! उदहारण मात्र दो ही देता हु इसके आगे तो हम सब जानते ही है !
धन्यवाद !
सत्येन्द्र कुमार
Permalink Reply by Gaurav Gupta on May 31, 2012 at 9:52pm satyendra जी ये practicle लैब है यहाँ हम ज्यादा philoshophy नहीं झार सकते है यहाँ पे natural sense की बाते होती है चिति काट रहा है तो सबको थोडा थोडा गुड तो देना ही पड़ेगा और कानूनों के माध्यम से laxman रखा खीचना पड़ेगा
Permalink Reply by satyender kumar on June 2, 2012 at 9:42am इसके लिए हमें क्या देना पड़ेगा ?
Started by R Singh in Bihar Politics 2 hours ago. 0 Replies 0 Likes
Started by Shalu Sharma in Bihar Politics. Last reply by R Singh 2 hours ago. 1 Reply 1 Like
Started by Ragini Bhatiya in Bihar Politics. Last reply by Mohammed Firoz 11 hours ago. 86 Replies 5 Likes
Posted by Suren Yadav on June 2, 2012 at 6:37pm 1 Comment 4 Likes
Posted by Gunjan Kumar on October 4, 2012 at 9:03am 2 Comments 1 Like
Posted by syed asifimam kakvi on June 26, 2010 at 7:18pm 0 Comments 0 Likes
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