बिहार में सुशासन कायम करने का डंका पीट रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की निगाह अब प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है. क्या योजना है उनकी? उनके हक में क्या है और खिलाफ क्या? पेश है रिपोर्ट-

बिहार दिवस के नाम पर सूबे से बाहर निकल कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बनाने की ओर प्रयासरत नीतीश मानो प्रधानमंत्री बनने की मुक्कमल तैयारी में जुट गए है. बिहार के अस्तित्व में आने के सौ साल पूरे होने के मौके पर मुंबई और दिल्ली में आयोजित समारोहों में उनके तेवर देखने के बाद कुछ लोग उन्हें भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं. हालांकि वे खुद इस दौड़ में शामिल होने की बात से अक्सर इंकार करते रहे हैं. मौजूदा हालात में राजनीतिक शतरंज की बिसात कुछ इस प्रकार बिछने लगी है कि इसमें कुछ भी असंभव नहीं है. नीतीश कुमार के लिए यह काम आसान नहीं तो मुश्किल भी नहीं है.


2005 में नीतीश ने जब बिहार की बागडोर संभाली थी, उससे पहले सूबे में गुंडाराज था. नीतीश ने कानून-व्यवस्था कायम की. सरकार के एक मंत्री कहते हैं कि 2006 से प्रदेश में तकरीबन 70 हजार अपराधियों को अभियुक्त घोषित किया जा चुका है और उनमें 47 हजार को जेल भेजा गया है. आनंद मोहन, पप्पू यादव और शहाबुद्दीन जैसे कद्दावर नेता भी सलाखों के पीछे भेजे गए. लोकप्रियता तो मिली मगर साथ ही नीतीश पर मीडिया मैनेजमेंट के आरोप भी लगने लगे. आरोप अपनी जगह, मगर पटना में पिछले दिनों सेक्स रैकेट का जो मामला उजागर हुआ, उससे तो यही कहा जा सकता है कि अपराध पर पूरी तरह लगाम लगाने का दावा नहीं किया जा सकता!
इस बीच 2008 में कोसी तटबंध के टूट जाने से बिहार का बड़ा हिस्सा बाढ़ की विभीषिका का शिकार बन गया. नीतीश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की अनदेखी करने के आरोप लगे. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस समेत बिहार के तमाम राजनीतिक दलों ने नीतीश सरकार के खिलाफ ताकत झोंक दी, लेकिन एनडीए गठबंधन के सामने उनकी एक न चली. रामविलास पासवान समेत कई कद्दावर नेता चुनाव हारे. इसका फायदा 2010 विधानसभा चुनाव में मिला, जब जदयू-भाजपा नीत एनडीए ने बहुमत हासिल किया.


आज जब सशक्त लोकपाल की मांग हो रही है, तब नीतीश कुमार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अख्तियार किया. उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों व सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू. राइट टू सर्विस एक्ट होने से लोगों को फायदे भी हुए हैं, लेकिन भ्रष्टïाचार को रोकने में इससे बहुत मदद नहीं मिल पाई है.
दूसरी पारी में आने के बाद से नीतीश गैर-राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के बहाने राजनीतिक फायदा उठाने की जुगत में हैं. मुबंई और दिल्ली में बिहार सदी के उपलक्ष्य में करवाए गए कार्यक्रमों में नीतीश का शामिल होना इसका प्रमाण है. मनसे प्रमुख राज ठाकरे को मनाने के लिए पूर्व मंत्री देवेश चंद्र ठाकुर को उनके पास भेजने से लेकर समारोह में मराठी भाषा में भाषण शुरू करने तक नीतीश के तमाम पैंतरे काम करते दिख रहे हैं. मराठी जुबान में भाषण देने को लेकर किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए, लेकिन बिहारियों के खिलाफ आग उगलने वाले राज ठाकरे को खुश करने पर लोग नीतीश से नाराज भी हो सकते हैं. मगर, पड़ोसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक संदेश भी पहुंच गया कि नीतीश सिर्फ  बिहार तक सीमित नहीं हैं.


देवेश चंद्र ठाकुर कहते हैं, 'नीतीश ने बिहार के विकास के लिए बेमिसाल काम किया है. लोकतंत्र में असीम संभावनाएं हैं तो बिहार के प्रगतिशील नेता को उनमें क्यों न देखा जाए?' इसके उलट राजद सांसद रामकृपाल यादव कहते हैं, 'भाजपा के पास नेताओं का अकाल तो पड़ा नहीं जो वह नीतीश को प्रधानमंत्री बनने देगी!' लोजपा नेता राघवेंद्र को नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने का कोई गुण नजर नहीं आता तो बिहार सरकार में मंत्री अवधेश प्रसाद कुशवाहा कहते हैं कि नीतीश के पास प्रधानमंत्री बनने की सारी योग्यताएं हैं.


ग्लोबल समिट 2012 में नीतिकारों, उद्योगपतियों एवं आर्थिक-राजनीतिक विश्लेषकों ने नीतीश कुमार के सुशासन की खूब तारीफ की. तमाम महत्वपूर्ण हस्तियां नीतीश की तारीफ के पुल बांध चुकी हैं. बिल गेटस ने नीतीश कुमार को 'मैन ऑफ डिस्टैंट विजन' तक कहा है. नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार से नेपाल जाने वाली हवाओं से अब शांति का पैगाम आता है. फिर भी बिहार में बहुत कुछ करना शेष है. सुशासन, सर्विस एक्ट, अनुबंध के आधार पर नियोजन का जितना लाभ बिहार की जनता को मिला है, उसके मुकाबले डंका कुछ ज्यादा ही पीटा जा रहा है.
पिछले दो वर्षों में नीतीश कुमार ने तीन बार विदेशों की यात्रा के दौरान चीन और भूटान के प्रधानमंत्रियों से लंबित पड़ी उन योजनाओं पर पुनर्विचार का आग्रह किया जिनसे बिहार को सीधा लाभ पहुंचता हो. कुछ योजनाओं को सीधे तौर पर बिहार में लगाने का आग्रह भी उन्होंने चीन और भूटान से किया. यह और बात है कि केंद्र सरकार की हामी के बिना यह संभव नहीं है.


नीतीश के रिपोर्ट कार्ड में एनडीए सरकार में बतौर रेल मंत्री मिले अच्छे नंबर भी चढ़े हुए हैं. वे देश के दूसरे ऐसे रेल मंत्री थे, जिन्होंने रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था. उनसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रेल मंत्री रहते हुए ऐसा किया था. नीतीश ही नहीं, सभी क्षेत्रीय दलों की नजर 2014 चुनाव पर टिकी है. उड़ीसा में नवीन पटनायक, बंगाल में ममता बनर्जी, तमिलनाडु में जयललिता की सरकार है. ये सभी संघीय मुद्दों पर नीतीश से इत्तफाक जताते रहे हैं. समीकरण बना तो नीतीश की सेक्यूलर छवि उनके काम आएगी. इसे बनाए रखने के लिए नीतीश ने कोई कसर नहीं छोड़ी. भाजपा से गठबंधन के बावजूद मोदी को चुनाव प्रचार के लिए बिहार नहीं आने दिया.


प्रेक्षक कहते हैं कि दो दुश्मनों के बीच बराबरी की दोस्ती बनाए रखने की कला में भी नीतीश माहिर हैं. कार्य -प्रतिद्वंद्विता और सेक्यूलरिज्म के सवाल पर नरेंद्र मोदी से नीतीश ने बराबर दूरी बनाए रखी. इसके विपरीत अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से उनके रिश्ते मधुर रहे. उनकी यह कला भी उन्हें औरों से अलग खड़ा करती है. यहां स्पष्ट कर दें कि नीतीश का भाजपा से तो गठबंधन रहा है, लेकिन शिवसेना से कभी नहीं. नीतीश कुमार ने आरएसएस और अखिल विद्यार्थी परिषद के आंदोलनों को नजरंदाज करते हुए किशनगंज में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर के लिए जमीन मुहैया करके भी तगड़ा संदेश दिया. बीते सप्ताह एनसीटीसी के गठन को लेकर दिल्ली में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में नीतीश का एक और पैंतरा देखने को मिला. एनसीटीसी के मुखर विरोधी नरेंद्र मोदी अपनी जगह से उठकर उनके पास आए तो नीतीश ने भी खूब गर्मजोशी दिखाई. दोनों काफी देर तक हाथ मिलाते रहे और बातें करते रहे.


इतनी दौड़-धूप और उखाड़-पछाड़ के बाद 2014 में नीतीश प्रधानमंत्री पद की दौड़ में कहां तक पहुंचेंगे यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है प्रधानमंत्री बनने पर देश की जनता उनसे यही उम्मीद करेगी कि वे विकास पुरुष और सेक्यूलर नेता की अपनी छवि को बरकरार रखते हुए एक राजनेता का धर्म निभाएं.

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Nitish Kumar for Prime Minister ?

Why not Mayavati also called Bahen Ji ? She is more sophisticated, better dressed and give better speech.

And what about Amar Singh ?

please must watch this video of great shankaracharya,what is he telling about islam

Shankracharya Speaks about Islam

http://youtu.be/3VqBVGgS-J8



Munna Lal said:

Nitish Kumar for Prime Minister ?

Why not Mayavati also called Bahen Ji ? She is more sophisticated, better dressed and give better speech.

And what about Amar Singh ?

please must watch this video of great shankaracharya,what is he telling about islam

Shankracharya Speaks about Islam

http://youtu.be/3VqBVGgS-J8

Miah Nitish Kumar lagta hai pagal ho gaya hai. pradhan mantri banne ka khuwab dekh raha hai. 

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