जब ज़िन्दगी की चाहत हो तो मौत करीब आ जाती है.....एक एक क्षण कैसा लगता होगा जब ये एहसास होता होगा की ज़िन्दगी काफी दूर निकलती हुयी जा रही है और मौत बस कुछ ही पलों में दस्तक देने वाली है ? शायद लगता होगा की जी भर के देख लूं एक नजर तमाम दोस्तों, रिश्तेदारों और दुनिया के समस्त खुशिओं को और इस कसमसाहट में ज़िन्दगी का एक एक पल कितना बोझिल हो जाता होगा. शायद यही.....हाँ यही एहसास से जूझते हुए देखा मैने अपनी सबसे छोटी बहन को. पिछले तीन सालों से वो कई बिमारियों से जंग लडती रही, कभी हारती तो कभी जीत जाती. कभी लीवर की समस्या तो कभी ब्लड सुगर की समस्या. कभी ब्लड प्रेसर अपने अधिकता से ऊपर उठ जाता तो कभी पित्त की थैली की पथरी का दर्द परेशान कर देती.
लेकिन वो इन सभी समस्याओं से जूझती हुयी आगे निकलती जा रही थी. कभी स्वस्थ होकर हंसने बोलने लगती तो कभी अस्वस्थ होकर बिस्तर पर निढाल हो जाती या फिर नर्सिंग होम के आईसीयू में कुछ दिन गुजर कर फिर से कुछ दिन और जीने का तोहफा मेडिकल साईंस से प्राप्त कर के घर को वापस आती. फिर से घर में वही खुशियाँ रंग बिखेरने लगती. मन का तनाव दूर हो जाता था और हम सब राहत की सांस लेते थे की चलो अब ये अंत हो गया इसके दुखों का. लेकिन कहते हैं की विधाता का खेल कभी कभी बड़ा ही क्रूड हो जाता है. उसकी क्रूड़ता इंसान को अंतिम क्षणों में भी बचने का कोई उपाय नहीं छोडती. ऐसा ही हुआ है मेरी सबसे छोटी बहन के साथ.
अब एक नयी और विकट समस्या सामने है उसके और हम्सबों के भी. उसके दोनों किडनी ने अचानक काम करना बंद कर दिया है. दोनों पैरों में लकवा ने घातक प्रहार किया और अब बिस्तर ही उसकी दुनिया बन चुकी है. शारीर इतना कमजोर हो चूका है की ना तो डायिलिसिस हो सकती है और ना ही किडनी बदली जा सकती है.........मौत उसके सामने खड़ी है उनसे सामने और हम सभी के सामने भी.........इतना विवश अपने आप को शायद मैने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं पाया था.....और शायद इतना दुखद क्षण भी मैने कभी अपने जीवन में नहीं देखा है. इसी महीने की सात तारीख को मैं पटना गया...उसको देख कर सन्न रह गया.....अजीब सा सुजा हुआ चेहरा.....बिस्तर पर निढाल पड़ी हुयी....बेबस और लाचार....करवट बदलने के लिए भी वो अब दुसरे पर निर्भर है.....ऊपर से सबसे बड़ी समस्या ये की पुरे दिन में बस दो सौ एम्एल से ज्यादा पानी देना मन है....बिस्तर पर पडे हुए, दूसरों पर निर्भर और एक एक बूंद पानी को तरसते हुए जब मैंने उसको देखा तो ऐसा लगा की अब शायद उसको फिर से देखना मुवस्सर नहीं होगा. बस एकटक वो मुझे देखती रही...निर्भाव....बिना किसी भाव का उसका ये चेहरा मेरे आखों में आंसुओं का सैलाब ले आया.....ये आंसू उसके बेबसी को देखकर थे, ये आंसू उसके सिमित दुनिया को देखकर थे, ये आंसू इस बात के थे की अब वो अपनी अंतिम सांसें ले रही थी.....वो बेबस थी और मैं भी......अंतिम सांसों के इन्तेजार में वो ज़िन्दगी काट रही थी......मैने पूछा कुछ कहना चाहती हो मुझसे ? उसने लडखडाते हुए जुबान में कहा--"मैं मरना नहीं चाहती".........
इस बात को लिखकर मेरे आँखों में आज भी एक सैलाब सा तैर रहा है और गला रुंध चूका है.
सुना है की जब सभी लोग दुआएं करें तो विधाता भी मजबूर हो जाता है अपने क्रूड फैसले को बदलने के लिए........आप सभी फेस्बुकिया मित्रों से एक गुजारिश है की उसकी ज़िन्दगी के लिए दुवा मांगें.....आपकी दुवा शायद उसको फिर से नयी ज़िन्दगी दे दे......सच कहूँ तो अब मेडिकल साईंस पर उतना विश्वास नहीं रहा जितना आपकी दुवाओं पर आज मैं विश्वास कर रहा हूँ.
आपका ही मित्र
राज
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Permalink Reply by raja amar on August 22, 2011 at 9:08am
Permalink Reply by Shalu Sharma on August 22, 2011 at 5:14pm
Permalink Reply by preeti jha on August 22, 2011 at 5:28pm Raj JI,
Hum sabe ke duayee aapke sister ke sath hai...uparwaala itna krur nahi ho sakta, hausla rakhiye...
Regds,
preeti jha
Permalink Reply by sanjay kumar pandey on August 22, 2011 at 10:34pm Started by Amresh Rajput in Bihar 13 hours ago. 0 Replies 0 Likes
Started by Raman Tiwari in Bihar. Last reply by ajay jha on Friday. 5 Replies 0 Likes
Posted by Suren Yadav on June 2, 2012 at 6:37pm 1 Comment 4 Likes
Posted by Gunjan Kumar on October 4, 2012 at 9:03am 2 Comments 1 Like
Posted by Gunjan Kumar on October 2, 2012 at 3:15pm 3 Comments 0 Likes
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